बंगाल विधानसभा में विपक्ष के बर्हिगमन के बाद मंगलवार को सिंगुर भूमि पुनर्वासन एवं विकास विधेयक 2011 ध्वनिमत से पारित हो गया। संसदीय कार्य मंत्री पार्थ चटर्जी ने विधेयक को सदन में पेश किया। दो घंटे चली बहस के बाद जहां विपक्ष ने विधेयक में तकनीकी खामियों का हवाला देकर सदन का बहिष्कार किया, वहीं सत्ता पक्ष ने मेज थपथपाकर विधेयक को ध्वनिमत से पारित करा लिया। विधेयक पर बहस के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि उनकी सरकार की प्राथमिकता सिंगुर के अनिच्छुक किसानों को भूमि लौटाना है और वह इसके लिए वैधानिक कदम उठा रही हैं। वाम मोर्चा सरकार की प्राथमिकता पार्टी कैडरों को भत्ता प्रदान करना था, लेकिन उनकी प्राथमिकता अपने पार्टी के लोगों को लाभ पहुंचाना नहीं बल्कि आम जनता के हित में काम करना है। इस बीच विपक्ष ने इतने महत्वपूर्ण विधेयक को कई तकनीकी खामियों के साथ जल्दबाजी में सदन में लाने पर आपत्ति जताई और मुख्यमंत्री के जवाबी भाषण के बाद वाकआउट किया। विपक्ष की अनुपस्थिति में ध्वनिमत से पारित हो गया। मुख्यमंत्री ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि वाम मोर्चा के 34 वषरें के शासन में पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य, शिक्षा और उद्योग आदि हर क्षेत्रों में पिछड़ गया है। उनके लिए एक-एक मिनट कीमती है। राज्य को विकास की पटरी पर लाने के लिए उन्हें तेज रफ्तार से काम करना होगा। उनके लिए हर रोज महत्वपूर्ण है। पूर्ववर्ती सरकार ने सिंगुर में जबरन पुलिस की मदद से भूमि का अधिग्रहण किया था। जब उन्होंने विरोध में आंदोलन शुरू किया तो उनके साथ किसानों पर भी अत्याचार किया गया। अब विपक्ष विधेयक में तकनीकी खामियों के आधार पर विरोध जता रहा है, लेकिन वह व्यवहारिकता में ज्यादा विश्वास रखती हैं। पश्चिम बंग औद्योगिक विकास निगम ने भूमि का अधिग्रहण किया था। इसलिए सरकार उसके मार्फत पहले जमीन अपने अधिकार में लेना चाहती है, ताकि अनिच्छुक किसानों को उसमें से जमीन लौटाई जा सके। भूमि पर जब सरकार का अपना अधिकार हो जाएगा तो यह बाद में भी तय हो सकता है कि उसे भूमि विभाग के अधीन रखा जाए या उद्योग विभाग के पास ही रहने दिया जाए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार पट्टा या लीज नहीं बल्कि किसानों को संपूर्ण रूप से उनकी भूमि लौटा देगी। उन्होंने कहा कि उनकी मां, माटी, मानुष की सरकार में जबरन किसी की भूमि नहीं ली जाएगी। सरकार एक नई भूमि नीति तैयार कर रही है। इसके लिए विशेषज्ञों की कमेटी बनाई गई है।
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