अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री सलमान खुर्शीद ने एलान किया है कि सांप्रदायिक हिंसा भड़काने वालों से सख्ती से निपटने के लिए विधेयक कैबिनेट की मंजूरी के बाद जल्द ही लोकसभा में पेश किया जाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि प्रस्तावित विधेयक में इस बार कड़े प्रावधान शामिल किए गए हैं। सांप्रदायिक हिंसा रोकथाम विधेयक पर पहले काफी विवाद हो चुका है। सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (एनएसी) ने 2005 में तैयार विधेयक में तमाम खामियों की ओर इशारा करते हुए इसे दोबारा तैयार करने का सुझाव दिया था। नागरिक संगठनों और नौकरशाही के बीच बिल के प्रावधानों को लेकर काफी होहल्ला मचा था। विपक्ष खासकर भाजपा भी इस विधेयक के तमाम प्रावधानों पर नाखुशी जाहिर कर चुकी है। एनएसी के उप समूह ने नया विधेयक तैयार किया है। खुर्शीद ने कहा कि बिल को प्रभावी बनाने के लिए तमाम महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। सांप्रदायिक हिंसा पर प्रभावी ढंग से निगरानी रखने और ऐसे मामलों में कड़ी सजा सुनिश्चित करने संबंधी विधेयक कैबिनेट की मंजूरी के लिए जल्द पेश होना है। फिर इसे लोकसभा में पेश जाएगा। दिल्ली में राज्यों के अल्पसंख्यक आयोगों के वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए खुर्शीद ने कहा कि यह विधेयक अपने अंतिम चरण में है। उन्होंने दोहराया कि सांप्रदायिक हिंसा (रोकथाम, नियंत्रण, पुनर्वास) विधेयक पर खासी प्रगति हो चुकी है। इस विधेयक में दंगा पीडि़तों को उचित मुआवजे पर ध्यान दिया गया है मगर संसद में पेश करने से पहले इस बारे में विस्तार से कुछ नहीं बताया सकता। मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय सलाहकार परिषद, गृह मंत्रालय और कानून मंत्रालय ने बिल पर बहुत मेहनत की है। इसमें गैर सरकारी संगठनों के तमाम सुझाव भी शामिल किए गए हैं। अल्पसंख्यक समुदाय के व्यक्तियों को गलत ढंग से मुकदमे में फंसाए जाने के दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग पर उन्होंने भरोसा दिलाया कि विधेयक निष्पक्ष, तार्किक और संतोषजनक होगा। सच्चर कमेटी की सिफारिशों के बारे में खुर्शीद ने कहा कि आयोग की ज्यादातर सिफारिशों को अमल में लाया जा चुका है। आरक्षण और कुछ मामले और हैं जिन पर सरकार विचार कर रही है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा दिए जाने की मांग के संदर्भ में उन्होंने कहा कि यह मामला अदालत के विचाराधीन है।
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