Monday, March 21, 2011

सांप्रदायिक हिंसा के खिलाफ जल्द आएगा बिल


अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री सलमान खुर्शीद ने एलान किया है कि सांप्रदायिक हिंसा भड़काने वालों से सख्ती से निपटने के लिए विधेयक कैबिनेट की मंजूरी के बाद जल्द ही लोकसभा में पेश किया जाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि प्रस्तावित विधेयक में इस बार कड़े प्रावधान शामिल किए गए हैं। सांप्रदायिक हिंसा रोकथाम विधेयक पर पहले काफी विवाद हो चुका है। सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (एनएसी) ने 2005 में तैयार विधेयक में तमाम खामियों की ओर इशारा करते हुए इसे दोबारा तैयार करने का सुझाव दिया था। नागरिक संगठनों और नौकरशाही के बीच बिल के प्रावधानों को लेकर काफी होहल्ला मचा था। विपक्ष खासकर भाजपा भी इस विधेयक के तमाम प्रावधानों पर नाखुशी जाहिर कर चुकी है। एनएसी के उप समूह ने नया विधेयक तैयार किया है। खुर्शीद ने कहा कि बिल को प्रभावी बनाने के लिए तमाम महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। सांप्रदायिक हिंसा पर प्रभावी ढंग से निगरानी रखने और ऐसे मामलों में कड़ी सजा सुनिश्चित करने संबंधी विधेयक कैबिनेट की मंजूरी के लिए जल्द पेश होना है। फिर इसे लोकसभा में पेश जाएगा। दिल्ली में राज्यों के अल्पसंख्यक आयोगों के वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए खुर्शीद ने कहा कि यह विधेयक अपने अंतिम चरण में है। उन्होंने दोहराया कि सांप्रदायिक हिंसा (रोकथाम, नियंत्रण, पुनर्वास) विधेयक पर खासी प्रगति हो चुकी है। इस विधेयक में दंगा पीडि़तों को उचित मुआवजे पर ध्यान दिया गया है मगर संसद में पेश करने से पहले इस बारे में विस्तार से कुछ नहीं बताया सकता। मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय सलाहकार परिषद, गृह मंत्रालय और कानून मंत्रालय ने बिल पर बहुत मेहनत की है। इसमें गैर सरकारी संगठनों के तमाम सुझाव भी शामिल किए गए हैं। अल्पसंख्यक समुदाय के व्यक्तियों को गलत ढंग से मुकदमे में फंसाए जाने के दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग पर उन्होंने भरोसा दिलाया कि विधेयक निष्पक्ष, तार्किक और संतोषजनक होगा। सच्चर कमेटी की सिफारिशों के बारे में खुर्शीद ने कहा कि आयोग की ज्यादातर सिफारिशों को अमल में लाया जा चुका है। आरक्षण और कुछ मामले और हैं जिन पर सरकार विचार कर रही है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा दिए जाने की मांग के संदर्भ में उन्होंने कहा कि यह मामला अदालत के विचाराधीन है।

Saturday, March 12, 2011

सांसद निधि अब पांच करोड़


आम बजट 2011-12 पर संसद में जारी बहस का जवाब देते हुए वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने आम आदमी को अलग से तो कोई रियायत नहीं दी, लेकिन सांसद विकास निधि की सालाना राशि को ढाई गुणा बढ़ाने का जरूर एलान कर दिया। देश के प्रत्येक सांसद को अब हर वर्ष अपने संसदीय क्षेत्र के विकास के लिए दो करोड़ रुपये के बजाय पांच करोड़ रुपये मिलेंगे। लोक सभा में सांसद निधि बढ़ाने की घोषणा के साथ ही वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी इस निधि के इस्तेमाल का दुरुपयोग रोकने के लिए कड़े उपाय करने की तरफ भी इशारा किया। सभी दलों के सांसदों की तरफ से हो रही इस पुरानी मांग को पूरा करते हुए उन्होंने कहा कि, मैं चेतावनी से भरे कुछ शब्द कहना चाहूंगा। गुरुवार को सीएजी ने सांसद निधि के इस्तेमाल पर रिपोर्ट सौंपी है। इसमें निधि के बेहतर इस्तेमाल के कुछ सुझाव दिए हैं। जब निधि के इस्तेमाल संबंधी नियम बदलेंगे तब इन सुझावों को ध्यान में रखा जाएगा। बहरहाल, वित्त मंत्री के इस एलान का सत्ता व विपक्ष के सांसदों ने एकस्वर में स्वागत किया। सरकार पर इससे सालाना 2370 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। वित्त मंत्री ने बताया कि जिन पांच राज्यों में (असम, पश्चिम बंगाल, केरल, पुडुचेरी और तमिलनाडु) चुनाव होने वाले हैं, वहां के सांसद मई बाद ही बढ़ी हुई राशि का इस्तेमाल कर सकेंगे। बताते चलें कि इन राज्यों में अप्रैल और मई, 2011 में चुनाव होने वाले हैं। वैसे बढ़ी हुई राशि को अगले वित्त वर्ष अप्रैल, 2011 से मिलनी शुरू हो जाएगी|