Saturday, February 5, 2011

भ्रष्ट लोकसेवकों के होश फाख्ता,एसवीयू मुस्तैद


भ्रष्टाचार को लेकर सरकार के ऐलान-ए-जंग से भ्रष्ट लोकसेवकों के होश फाख्ता हैं। भ्रष्टाचार के बूते कुबेर बनने की कोशिश कर रहे ऐसे लोकसेवकों के अब कंगाल होने की बारी है। सरकार ने जनता की गाढ़ी कमाई और योजनाओं में गोलमाल कर रकम जुटाने वाले ऐसे भ्रष्ट लोकसेवकों को पैदल करने की तैयारी कर ली है। उनकी आलीशान इमारतों में बच्चे पहाड़ा सीखेंगे। बैंक में उनकी रखी रकम और लग्जरी गाड़ियां जब्त हो जाएंगी। भ्रष्टाचारियों की सम्पति जब्त करने के लिए नया कानून पर अमल करते हुए एक एमवीआई अफसर के खिलाफ यह प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। अठारह और भ्रष्ट लोकसेवकों पर शिकंजा कसने की तैयारी है जिनके विरुद्ध आय से अधिक संपति होने की जांच चल रही है। बिहार में कई ऐसे क्लास वन अफसर भी है जो इस कानून की जद में होंगे। ये ऐसे अफसर हैं जिनपर आय से अधिक संपति अर्जित करने का मामला चल रहा है। ये मामले अनुसंधान के अंतिम चरण में हैं। इन मामलों की जांच स्पेशल विजिलेंस यूनिट कर रही है। आय से अधिक सम्पति अर्जित करने से जुड़ें ऐसे पांच मामलों में एसवीयू ने कार्रवाई की है, जिनमें से तीन मामलों में चार्जशीट भी फाइल की जा चुकी है। एसवीयू बाकी मामलों में भी जांच-पड़ताल और तेज करने में जुटी है और संभावना है कि अन्य मामलों में भी जल्द ही जांच पूरी कर ली जाएगी।

पिछले 25 वर्षो में निगरानी अंवेशण ब्यूरो ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत राज्य के एक हजार सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ निगरानी की विशेष अदालत में चार्जशीट दायर की है। सतर्कता विभाग के अनुसार 2006 से अब तक बिहार में करीब 365 कर्मचारियों के यहां छापे मारे गए। इन कार्रवाइयों में 300 कर्मचारियों के करोड़पति होने का खुलासा हुआ है। पिछले 4 साल में विजिलेंस ने भ्रष्टाचार के आरोप में 596 गैजेटेड और 632 नॉन गैजेटेड अफसरों पर कार्रवाई की। इनके अलावा 2006 से पहले भी 302 लोगों के खिलाफ सतर्कता विभाग ने मामले दर्ज किए। फिलवक्त एसवीयू की जद में आए अफसरों में पूर्व पुलिस महानिदेशक नारायण मिश्र, आईएएस अधिकारी शिवशंकर वर्मा, राज्य औषधि नियंत्रक वाईके जायसवाल, लघु जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता अवधेश प्रसाद सिंह और राजभाषा निदेशक डी एन चौधरी शामिल हैं।

निगरानी अन्वेशण ब्यूरो के रिकार्ड के अनुसार अब तक की ट्रैपिंग की बात करे तो घूस की सर्वाधिक रकम 1.5 लाख तक रही है और यह रिकार्ड ग्रामीण कार्य विभाग के एक कार्यपालक अभियंता के नाम है। दूसरे नम्बर पर रहे बिजली बोर्ड के एक मुख्य अभियंता शिन्हें ब्यूरो की टीम ने 1 लाख रुपये रिष्वत के साथ गिरफ्तार किया था। तीसरे नम्बर पर रहे लखीसराय में वन क्षेत्र पदाधिकरी।

ब्यूरो ने उन्हें 80 हशार रुपये घूस लेते गिरफ्तार किया था। चौथे नम्बर पर 76 हशार रुपये घूस के साथ दबोचे गए सहायक नाशिर रहे और पांचवे नम्बर पर है एक पंचायत सचिव। उन्हें 75 हशार रुपये के साथ गिरफ्तार किया गया था। इसके अलावा भी कई घूसखोरों को विशिलेंस ने हशारों रुपये घूस लेते हुए रंगेहाथ दबोचा। आमतौर पर दाखिल-खारिज, किसान केंड्रिट कार्ड के वितरण, भू-अर्जन में मुआवजा वितरण, आय व आवासीय प्रमाण पत्र बनवाने, माप-तौल विभाग, इंदिरा आवास के आवंटन और सर्वशिक्षा अभियान में घूसखोरी की सर्वाधिक शिकायतें मिलती रही हैं। गौरतलब हो कि बिहार की राजधानी पटना से लेकर गांवों तक भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी फैली है। फाइल बिना चढ़ावे के आगे नहीं बढ़ती है। बिहार में लोकसेवकों ने भ्रष्टाचार के जरिए कितना बटोरा, इसका अंदाजा सिर्फ इस बात से लगाया जा सकता है कि राज्य का विजिलेंस ब्यूरो आय से अधिक सम्पति के आठ करोड़ रुपये से अधिक के मामलों की जांच कर रहा है। भ्रष्टाचार की इस काली कोठरी में कर्मचारी से लेकर सरपंच और जिलाधिकारी व सचिव स्तर तक के अधिकारी तक शामिल हैं। मुख्यमंत्री के भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम के बावजूद यहां भ्रष्टाचार का ऊंट किस करवट बैठेगा, यह कहना अभी मुश्किल है.

No comments:

Post a Comment